11वीं के इतिहास की पुस्तक के पाठ्यक्रम से इस्लामी साम्राज्य के उदय का पाठ हटा दिया गया है।
12वीं के इतिहास की पुस्तक के मुगल शासन-प्रशासन से जुड़े पाठ में व्यापक बदलाव किया गया है।
12वीं के ही राजनीति विज्ञान से गुट निरपेक्ष आंदोलन और शीत युद्ध के पाठ को हटा दिया है।
10वीं के सामाजिक अध्ययन की पुस्तक से कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव वाला पाठ हटा दिया गया है।
10वीं के ही सामाजिक अध्ययन की पुस्तक से पाकिस्तानी शायर फैज़ अहमद फैज़ की दो नज़्मों-
1- इतनी मुलाकातों के बाद भी हम अज़नबी रहते हैं,
इतनी बारिश के बाद भी ख़ून के धब्बे रह जाते हैं।
2- आंसू बहाने के लिये पर्याप्त नहीं आज,
ज़ंजीरों में बंधे सार्वजनिक चौक पर चलो।
को भी हटा दिया गया है।